उद्योग

12 साल बाद पेप्सिको की सीईओ इंदिरा नूई छोड़ेंगी पद

कोल्ड ड्रिंक्स और फूड सेक्टर की दिग्गज कंपनी पेप्सीको की सीईओ इंद्रा नूई इस्तीफा देने जा रही हैं. वो 3 अक्टूबर को अपना पद छोड़ देंगी. इंद्रा नूई 2006 में कंपनी की पहली महिला सीईओ बनी थी. पेप्सिको की कमान अब प्रेसीडेंट रमोन लगुर्ता को दी गई है. उन्होंने कंपनी के साथ 24 साल तक काम किया. लगुर्ता पिछले 22 साल से पेप्सिको के साथ हैं. इंद्रा भारतीय मूल की हैं. उन्हें कॉर्पोरेट सेक्टर में महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के तौर पर देखा जाता रहा है. 3 अक्टूबर को ही लगुर्ता पेप्सिको के नए सीईओ का पद संभाल लेंगे. इंद्रा पेप्सिको में सीईओ और चेयरमैन दोनों पद पर काम कर रहीं थी। वो 2019 की शुरुआत में चेयरमैन का पद भी छोड़ देंगी। इंद्रा नूई लगातार विश्व की टॉप 100 पावरफुल महिलाओं की लिस्ट में शामिल हो रही हैं। 2015 में उनको फॉर्च्युन ने विश्व की दूसरी सबसे पावरफुल महिला का खिताब दिया था। इंद्रा की उपलब्धियों पर कंपनी ने एक बयान में कहा कि 31 दिसंबर 2006 से 31 दिसंबर 2017 तक कंपनी ने 162 फीसदी का रिटर्न दिया है। उनके कार्यकाल के दौरान निवेशकों को 5.4 लाख करोड़ रुपए लौटाए गए। इंद्रा नूई के समय में 2006 से डिविडेंड 1.16 डॉलर से बढ़कर 3.17 डॉलर हो गया। कंपनी के बयान के मुताबिक कंपनी हर साल 5.5 फीसदी की दर से ग्रोथ कर रही है। पेप्सिको के 53 साल के इतिहास में लगुर्ता छठे सीईओ होंगे। 22 साल के उनके करियर में उन्होंने कंपनी में कई पदों पर काम किया है। सितंबर 2017 से वो पेप्सिको के प्रेसीडेंट पद पर काम कर रहे थे। लगुर्ता इससे पहले यूरोप सब सहारन अफ्रीका कारोबार के सीईओ थे। वो इससे पहले स्पेन की चुपा चुप्स कंपनी में काम करते थे।

चेन्नई में हुआ था जन्म

इंदिरा नूयी का जन्म चेन्नई में 1955 में हुआ था। उनके पिता स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और दादा जिला जज थे। उन्होंने मैनेजमेंट का कोर्स आईआईएम-कलकत्ता से पूरा किया। वर्ष 2001 में इंदिरा ने सीएफओ के तौर पर पेप्सिको ज्वाइन की है, तब से लेकर अब तक पेप्सिको का मुनाफा 2.7 बिलियन डॉलर से बढ़कर 6.5 बिलियन डॉलर हो गया है। इंदिरा ने पेप्सिको ज्चाइन करने से पहले कई महत्वपूर्ण पदों पर बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप,आसिया ब्राउन बोवेरी,मोटोरोला,जॉनसन एंड जॉनसन और मेटुर बर्डसेल शामिल है। इंदिरा को टाइम मैगजीन में ‘दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची’ में 2007 और 2008 में जगह दी गई। उनकी इस उपलब्धि से देश का नाम ऊंचा हुआ।

पद्म विभूषण से हो चुकीं है सम्मानित

वर्ष 2007 में भारत सरकार ने इंदिरा को पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा था। इंदिरा गर्ल्स बैंड में लीड गिटारिस्ट के तौर पर अपना सहयोग देती थीं। वह ज्यादा पैसे कमाने के लिए कब्रिस्तान में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्य करती थीं। वहां उन्हें 50 सेंट मिलते थे। इंदिरा को कैरोके गाने का बहुत शौक है,इसलिए उन्होंने घर पर एक मशीन भी लगा रखी है।