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मॉब लिंचिंग : नतीजे और उपाय

मॉब लिंचिंग क्या है
यहाँ मॉब का मतलब मोबाइल से है जबकि लिंचिंग का अर्थ ‘गैर कानूनी ढंग से प्राणदंड’ या ‘भीड़ द्वारा हत्या’ कर देने से है।
यह चर्चा में क्यों है?
हाल ही में देश भर में कई जगहों पर मॉब लींचिंग की घटनाएं हुई हैं। अफ़वाहों के चलते भीड़ ने कई लोगों को पीट-पीट कर हत्या कर दी। ताजा घटना की बात करें तो, राजस्थान में हुई 20 जुलाई 2018 को गौ तस्करी के संदेह पर भीड़ ने एक शख्स की पीट – पीटकर हत्या कर दी। हालाँकि लिंचिंग में कई और कारण भी आते हैं जैसे ‘बच्चा चोरी’ , ‘बच्‍चे का अपहरण’, ‘गऊ तस्करी’ या गो मांस का इस्तेमाल करना आदि। ऐसे अफवाहों के चलते भीड़ उस इंसान की पीट पीट कर हत्या कर देती है जिस पर भीड़ को शक होता है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
देश में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या यानी मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई 2018 को बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने संसद से मॉब लिंचिंग के खिलाफ नया और सख्त कानून बनाने को कहा है। आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘कोई भी नागरिक अपने आप में कानून नहीं बन सकता है। लोकतंत्र में भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती।’ सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को सख्त आदेश दिया कि वो संविधान के मुताबिक काम करें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी। आपको बता दें, प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने भीड़ हत्या की घटनाओं को ‘भीड़तंत्र का भयावह कृत्य’ करार दिया था।
क्या कहता है डाटा
2017 से अब तक पीट-पीट कर मार देने से हुई ये 32वीं हत्या है। सिर्फ साल 2018 की बात करें तो वाट्सऐप के जरिए अफवाह फैलने के बाद हुई ये 21वीं हत्या है। इस आंकड़ें में गोरक्षा के नाम पर हुई लिंचिंग की घटनाओं को शामिल कर दें, तो साल 2015 से अब तक 100 से ज्यादा मौतें हो चुकीं हैं।
क्या है कानून
लिंचिंग के नेचर और मोटिवेशन के सामान्य मर्डर से अलग होने के बावजूद भारत में इसके लिए कोई अलग से कानून मौजूद नहीं है। आईपीसी में लिंचिंग जैसी घटनाओं के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर किसी तरह का ज़िक्र नहीं है और इन्हें सेक्शन 302 (मर्डर), 307 (अटेम्प्ट ऑफ मर्डर), 323 ( जानबूझकर घायल करना), 147-148 (दंगा-फसाद), 149 (आज्ञा के विरूद्ध इकट्ठे होना) के तहत ही डील किया जाता है।
नीतू अमित सैनी