अपराध

एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन में कायम धोखाधड़ी का खुलासा

लंबे समय से चली आ रही धोखाधड़ी भारत के एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन को खोखला करती जा रही है क्योंकि फेडरेशन पिछले 28 सालों से एक ही परिवार के हाथों में है। इस धान्द्ली का पर्दाफाश करने के उद्देश्य से लीगल एक्सपर्ट एंड सुप्रीम कोर्ट के लॉयर भरत नागर ने दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। इस दौरान बताया गया कि एकेएफआई को श्री जनार्दन सिंह गहलोत और उनके परिवार द्वारा एक निजी संपत्ति के रूप में चलाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने पॉवर का दुरुपयोग कर अपने निजी फायदों के लिए आवंटित राशि का दुरुपयोग किया है। इस अवसर पर अर्जुन पुरस्कार विजेता और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी महिपाल सिंह और वीरेंद्र कुमार उपस्थित रहे। दिल्ली कोर्ट के 30 जनवरीए 2018 के आदेश के निरीक्षण अनुसारए फेडरेशन पर पिछले 28 वर्षों से भी ज्यादा समय से एक ही परिवार ने अपना अधिकार जमाया हुआ है। सबसे पहले श्री जेण्एसण् गहलोत ने प्रेसिडेंट  के रूप में 21 साल तक फेडरेशन पर राज कियाए उनके बाद उनकी पत्नी डॉ मृदुल भदौरिआ गहलोत ;जयपुर में पूर्णकालिक स्त्री रोग विशेषज्ञद्ध और फिर उनके बेटे श्रीमान तेज प्रताप (पेशे से इंजीनियर) ने अपना अधिकार जमा रखा है।  प्रेस कांफ्रेंस को संबधित करते हुए लीगल एक्सपर्ट एंड सुप्रीम कोर्ट के लॉयर भरत नागर ने कहा कि भारत के एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन की प्रबंध समिति में किसी भी पद के लिए कभी भी कोई चुनाव नहीं हुआ है और पदाधिकारियों की  नियुक्तियां मनमाने तरीके से की गयीं है। यहां तक कि जब राष्ट्रीय खेल संहिता ने 70 साल से ऊपर किसी को इस पद को पाने पर पाबंदी लगाई तो श्री जेण्एसण् गहलोत ने विशेष जनरल बॉडी मीटिंग बुलाई और एसोसिएशन और एकेएफआई संविधान बदलकर खुद को लाइफ प्रेजिडेंट के रूप में नियुक्त कराया। दिल्ली उच्च न्यायालय में एकेएफआई के खिलाफ याचिका दायर करने वाले राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी महिपाल सिंह ने बताया कि एक रैकेट उभर रहा है जहां गैर.खिलाड़ी 40 से 50 लाख रुपये का भुगतान करते हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय कबड्डी कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति मिल जाती है। जब टीम गोल्ड या रजत पदक जीतती है तो उन्हें सरकार से 2 करोड़ रुपये / 1 करोड़ रुपये का बड़ा पुरस्कार मिलता है। यह एकेएफआई में इतनी खेदजनक स्थिति है जहां 40 साल से अधिक उम्र के खिलाड़ी अभी भी खेल रहे हैं जहां युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं दिया जाता है। रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से बताते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर अधिकांश खिलाड़ियों के जन्म की तारीख 1 9 80 के दशक में है। यहां तक कि फेडरेशन के प्रधान के करीबी रिश्तेदारों को राष्ट्रीय टूर्नामेंट में बिना किसी पूर्व भागीदारी के सीधे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत के लिए खेलने की इजाजत दी गई।
बीसीसीआई बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के मामले में अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी राजनेताए नौकरशाहए जो विशेष खेल से संबंधित नहीं हैंए को इस तरह के पदों पर खेल से संबंधित मामलों को नियंत्रित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए । इस संदर्भ में एकेएफआई में मामले वास्तव में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की अवमानना ही होगी।