समाज

बलात्कार पर मौत की सजा मिले तभी ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा

उन्नाव में भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर और उसके साथियों द्वारा गैंगरेप की घटना पर भाजपा नेता अभी लीपापोती कर ही रही थी कि कठुआ में 8 वर्षीय अबोध बालिका के साथ हुए वीभत्स कांड ने रोंगटे खड़े कर दिये और देश की जनता उस वक्त अवाक रह गई जब इस घटना को भाजपा के कुछ नेताओं ने साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की और जम्मू−कश्मीर में पीडीपी−भाजपा गठबंधन सरकार के भाजपा के दो मंत्री एक ऐसे प्रदर्शन में शामिल हुए जो आरोपियों के पक्ष में आयोजित किया गया था। चार दिन भाजपा के नेता इन घटनाओं पर लीपापोती करते रहे लेकिन जब सोशल मीडिया से लेकर तमाम मंचों पर इन घटनाओं का प्रति जनता में रोष दिखाई दिया तो भाजपा के नेताओं की भाषा बदल गई और चार दिनों की चुप्पी के बाद आखिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कड़े शब्दों में कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा।

प्रधानमंत्री के इस भाषण से एक दिन पहले ही इस मामले पर भाजपा के रुख में परिवर्तन करने पर पार्टी में सहमति बन गई थी जब जम्मू में भाजपा नेताओं के आरोपियों के समर्थन में शामिल होने और उन्नाव की घटनाओं से जनता में उपज रहे रोष से भाजपा की किरकिरी हो रही थी। इसके बाद सीबीआई ने भाजपा के विधायक कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार किया और जम्मू−कश्मीर सरकार में शामिल भाजपा सरकार में शामिल भाजपा के मंत्रियों के इस्तीफा भी हुए लेकिन तब तक पूरे देश की जनता में यह संदेश जा चुका था कि भाजपा की कथनी और करनी में भारी अंतर है और अब यह अपराध और अपराधियों को भी सांप्रदायिक नजरिए से देख रही है।
इन घटनाओं से जिस प्रकार का रोष पनप रहा है वैसा ठीक छह साल पहले दिल्ली की सड़कों पर निर्भया गैंगरेप हत्याकांड के बाद दिखाई दिया था। इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के तमाम बड़े नेता दिल्ली के इंडिया गेट पर आधी रात को जब कैंडल मार्च के जरिये कठुआ और उन्नाव पीड़ितों को इंसाफ दिलाने निकले तो स्वतः स्फूर्त भीड़ उनके साथ जुट गई और सरकार से त्वरित न्याय की मांग की तब जाकर सरकार को घटनाओं की गंभीरता समझ आई अन्यथा इससे पहले दूसरे प्रदेशों की घटनाओं का हवाला देकर भाजपा के नेता जैसे पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रहे थे। निर्भया गैंगरेप के बाद आम जनता सड़कों पर निकल पड़ी थी और देश भर में दुष्कर्म के खिलाफ एक माहौल बना था।
देश में बलात्कार के खिलाफ कड़े कानून की मांग हुई थी और आनन−फानन में सुधार किया भी किया गया था तथा 100 करोड़ रूपए के फंड से पीड़ितों को उचित सहायता के लिए निर्भया कोष की स्थापना की गई थी लेकिन ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि इसका सदुपयोग नहीं किया जा रहा है। दुष्कर्म की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और अब तो देश में एक ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि अपराध को धर्म और जाति से जोड़कर अपराधियों के पक्ष में तर्क गढ़े जा रहे हैं। कठुआ की घटना तो और भी शर्मनाक है कि इसे योजनाबद्ध तरीके से साजिश रचकर मंदिर में मंदिर के ही पढ़े−लिखे सरकारी रिटायर्ड कर्मचारी पुजारी, उसके बेटे, भतीजे और पुलिसकर्मी ने अंजाम दिया और 8 वर्ष की उस अबोध बालिका को एक सप्ताह तक भूखा−प्यासा रखकर नशीली दवाएं खिलाकर अचेत रखा गया और अंततः पत्थरों से उसके चेहरे को कुचल कर मार दिया गया। लेकिन भाजपा के नेता इसे साम्प्रदायिक रंग देकर पूरे देश में उन्माद फैलाने का काम कर रहे थे और ऊपर से कानून की रक्षा का दावा करने वाले वकीलों का समूह अपराधियों के पक्ष में खड़ा होकर न्याय को बाधित करने का प्रयास कर रहा था और यहां तक कि पीड़ितों की पैरवी करने वाली वकील को धमकियां मिल रही हैं तथा सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है लेकिन अब उच्चतम न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की ठानी है जो स्वागतयोग्य कदम है।
न्यायपालिका को अपना काम करने देना चाहिए और अगर कोई निर्दोष होगा तो वह स्वतः छूट जायेगा। 2012 निर्भया गैंगरेप के बाद कानूनों में बदलाव हुआ है लेकिन मानसिकता नहीं बदली है। उल्टे झूठे मुकदमे भी दर्ज हुए हैं। दुष्कर्म की घटनाओं में 9 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। घटनाओं की देशभर में प्रतिक्रिया को देखकर अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि इन घटनाओं से पूरा देश शर्मसार हुआ है और बेटियों को न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा है कि न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है और एक सभ्य समाज के रूप में, एक देश के रूप में हम सब इसके लिए शर्मसार हैं।
आज कठुआ की बेटी और उन्नाव की पीड़िता के साथ हुए अन्याय ने लोगों को एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। सालभर पहले हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में गुड़िया गैंगरेप और हत्या प्रकरण को भी लोग नहीं भूले हैं जिसमें आक्रोशित लोगों ने थाने में आग लगा दी थी और इसके बाद उस मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई थी और पांच पुलिसकर्मी आज भी जेल की सलाखों के पीछे हैं। इतने साल बाद भी कुछ नहीं बदला है। आज हालत यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, कठुआ से लेकर उन्नाव तक और कोटखाई से लेकर आसाम तक हर रोज बलात्कार की घटनाएं दर्ज हो रही हैं, लेकिन इंसाफ होता दिखाई नहीं दे रहा है। राजस्थान की भंवरी देवी की मामला भी जनता के जहन में है जिसमें राजनीतिक दखलअंदाजी खुलकर सामने आई थी। कठुआ की बेटी का मामला जनवरी 2018 में सामने आया था और अब गहन जांच के बाद मामले में चार्जशीट पेश कर दी गई है लेकिन न्याय को बाधित करने वाले उग्र हैं।
कठुआ गैंगरेप के बाद एक बार फिर बच्चियों का बलात्कार करने वालों को फांसी की सजा देने की मांग उठने लगी है। वैसे भी हमारे यहाँ जघन्य अपराधों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है और कठुआ की अबोध बालिका के साथ जो हुआ है वह धर्म और जाति की मसला नहीं है बल्कि जघन्यतम अपराध है और निश्चित ही इसके अपराधियों को सजा जरूर मिलेगी। बलात्कार की बढ़ती घटनाओं और जनता के रोष को देखकर राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने तो बाकायदा कानून बनाकर फांसी की सजा बहाल करने की मांग की है। मध्य प्रदेश विधानसभा ने पिछले साल 4 दिसंबर को सर्वसम्मति से दंड कानून (मध्य प्रदेश संशोधन) बिल−2017 पारित कर दिया जिसके तहत 12 या उससे कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म मामले में दोषी को मौत की सजा दी जाएगी। कठुआ गैंगरेप की घटना से आहत जम्मू−कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कड़ा कानून बनाने का वादा किया है और नाबालिगों के बलात्कारियों के लिए मौत की सजा का कानून बनाने का ऐलान किया है। दूसरे प्रदेशों में भी बच्चों के प्रति घृणित अपराधों के लिए कठोर कानून की मांग जोर पकड़ रही है। देश के कई राज्यों में दुष्कर्म के दोषियों को मौत की सजा देने का कानून प्रस्तावित है।
भारत में यदि दुष्कर्म के लिए मौत की सजा देने का प्रावधान किया जाता है तो भारत उत्तर कोरिया, सऊदी अरब, चीन, मिस्र, ईरान और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों की कतार में शामिल हो जायेगा क्योंकि इन देशों में दुष्कर्म पर मौत की सजा है। सऊदी अरब में दुष्कर्म के अपराधी का सिर काटकर सार्वजानिक तौर पर सजा दी जाती है। अफगानिस्तान और नार्थ कोरिया में एक हफ्ते के भीतर दोषी को गोली मार दी जाती है। चीन में दोषी को नपुंसक बनाकर उसकी हत्या कर दी जाती है। मिस्र और ईरान में दोषी को फांसी पर लटका देने का प्रावधान है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार, 2016 में देशभर में महिलाओं के साथ रेप के कुल 38947 मामले सामने आए, मतलब हर रोज औसतन 107 महिलाएं रेप का शिकार हुईं। साल 2015 में  महिलाओं के खि़लाफ़ रेप के सबसे अधिक मामले मध्य प्रदेश में दर्ज हुए। एनसीआरबी के अनुसार 2015 में देश भर में 34,651 रेप के मामले दर्ज हुए जिनमें सबसे ज्यादा 4,391 मध्य प्रदेश में थे। बच्चों के खि़लाफ हो रहे अपराध के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2014 में 8904 मामले सामने आए थे जो 2015 में बढ़कर 14913 हो गये और 2016 में बढ़ कर 35955 हो गए हैं। थाने में बलात्कार की शिकायतों का आंकड़ा 2012 में 24,923 से 39 प्रतिशत बढ़कर वर्ष 2015 में 34,651 हो गया है।