जनता की उम्मीदों पर खड़ी उतरी मोदी सरकार। हमने मंदिर के लिए ही तो वोट दिए थे जो आज पूरा हो रहा है तो क्या हुआ कि पूरे देश मे कोरोना, बाढ़ ,भुखमरी जैसी विपदा में फंसी है

चांदनी समीरse

जनता खड़ी उतरी मोदी सरकार।हमने मंदिर के लिए ही तो वोट दिए थे जो आज पूरा हो रहा है।

तो क्या हुआ कि अभी देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा है
तो क्या हुआ कि पूरे देश मे कोरोना, बाढ़ ,भुखमरी जैसी विपदा में फंसी है

तो क्या हुआ कि हमारे पास कोरोना पीड़ितों के इलाज़ के लिए पर्याप्त अस्पताल नहीं हैं।
तो क्या हुआ कि देश की करोड़ों जनता बेघर है और भुखमरी से मर रही है।

तो क्या हुआ हमारा देश कर्ज़ में डूबता जा रहा है।
हमें तो बस मंदिर बन जाय फिर सब चंगा है।

कितनी अफसोस कि बात है कि देश के बुद्धिजीवियों ने बहु आँखों के साथ साथ दिमाग पर भी पट्टी बांध ली है कि उन्हें सही गलत कुछ दिखाई नहीं दे रहा।

मंदिर बनानी है ज़रूर बनाए लेकिन ये ये समय मंदिर बनाने के लिए उचित है??? क्या इन पैसों का इस्तेमाल देश की बेघर गरीब भूख से मर रही जनता के भलाई के लिए नहीं किया जाना ज़्यादा ज़रूरी नहीं था।

आखिर देश की आर्थिक व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार क्या कर रही है?? देश की समस्याओं से निपटने के लिए क्या कर रही है??

क्या महंगाई घटी?? अपराध घटा?? शिक्षा व्यवस्था सुधर?? महिलाएं सुरक्षित हैं??

इन्हीं सारी समस्याओं से पीड़ित रहने के कारण हमने पिछ्ली सरकार को बदल कर इस नई सरकार को लाए। ताकि देश महंगाई की मार से बचे ग़रीबी कम हो। अपराध कम हो। स्त्रियाँ सुरक्षित हो।
क्या इनमे से एक भी बात पूरी हुई है।

सरकार चाहे जो हो जनता और देश की हालत तो यही रहनी है।

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