ग्रीन जोन को भी अभी नहीं ‘ग्रीन सिग्नल’, हालात परखने के बाद जारी होंगे दिशा-निर्देश

Lockdown 3 अभी उत्तर प्रदेश के हालात की समीक्षा की जा रही है। योगी सरकार नो रिस्क मोड पर शनिवार को दिशा-निर्देश जारी किए करेगी।

लखनऊ। Lockdown 3 : कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन को बढ़ाने के फैसले के साथ ही केंद्र सरकार ने चार मई से कोरोना वायरस से सुरक्षित क्षेत्रों के राहत का रास्ता खोल दिया है। ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन में अनुमन्य सुविधाओं-गतिविधियों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इस आधार पर अभी ग्रीन जोन को भी ग्रीन सिग्नल नहीं दिया गया है। अभी शासन स्तर पर उत्तर प्रदेश के हालात की समीक्षा की जा रही है।

यूपी की योगी सरकार ‘नो रिस्क’ मोड पर शनिवार को दिशा-निर्देश जारी किए करेगी।देश में कोरोना संक्रमण के हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन-3 की घोषणा करते हुए इसे 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया है, लेकिन इसी बीच गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को गाइडलाइन जारी कर दी कि चार मई से संक्रमण के मामलों-मानकों के आधार पर चिह्नित ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन में कौन-कौन सी सुविधा और गतिविधियों को अनुमति दी जा सकती है।

अब यह राज्यों पर निर्भर है कि वह इस गाइडलाइन के आधार पर किस तरह कदम आगे बढ़ाते हैं।मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बताया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के आधार पर प्रदेश के हालात की समीक्षा की जा रही है। शासन की सिर्फ एक ही मंशा है कि कैसे भी कोरोना के संक्रमण को बढ़ने से रोका जाए। ऐसे में सावधानीपूर्वक निर्णय किया जाएगा कि कितनी राहत दी जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद शनिवार को विस्तृत दिशा-निर्देश जिलों के लिए जारी कर दिए जाएंगे। वहीं, सूत्रों ने बताया कि गृह विभाग भी नए सिरे से जोन और सेक्टर स्कीम तय कर सकता है।

फिर जिलाधिकारियों के जिम्मे हो सकता है फैसला

लॉकडाउन का पहला चरण 14 अप्रैल को पूरा होने के बाद 15 अप्रैल से लॉकडाउन खुलना था, लेकिन हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे तीन मई तक बढ़ा दिया। केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल से कई गतिविधियों के लिए राहत की अनुमति दे दी थी। तब प्रदेश सरकार ने छूट का फैसला जिलाधिकारियों के जिम्मे छोड़ दिया था और कई डीएम ने किसी भी प्रकार की राहत देने से मना कर दिया था। इस बार भी संभव है कि जिलाधिकारियों को ही इसके लिए स्वतंत्र छोड़ा जा सकता है। मुख्य सचिव आरके तिवारी ने भी माना है कि हर निर्णय शासन स्तर से उचित नहीं है। स्थानीय परिस्थितियों को स्थानीय प्रशासन बेहतर समझ सकता है।

 

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