कोरोना मुक्ति की प्रयोगभूमि

कोरोना वायरस महासंकट के निजात पाने में दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियां धराशायी हो गई या स्वयं को निरुपाय महसूस कर रही है, ऐसे समय में दुनिया की नजरे भारत की ओर लगी है। क्योंकि भारत की जनता एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सुनियोजित तैयारियों, संकल्प एवं संयम के जरिये कोरोना को दूसरे चरण में बांध रखा है। दुनिया भारत की ओर आशाभरी निगाहों से देख रही है। भारत में इस महामारी से लडऩे की तैयारी एवं जिजीविषा की दुनिया ने प्रशंसा की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी स्वीकार किया है कि जनसंख्या के लिहाज से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश भारत के पास कोरोना से निपटने की व्यापक क्षमता है, क्योंकि इसके पास चेचक और पोलियो को खत्म करने का अनुभव है। भारत की क्षमता उस कोरोना को खत्म करने में मददगार होगी, जिससे दुनिया भर में 28,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और छह लाख से अधिक लोग संक्रमत हुए हैं। जबकि भारत में कोरोना से संक्रमित रोगियों की संख्या 933 है।कोरोना वायरस की स्थितियों ने जीवन में अस्थिरता एवं भय व्याप्त कर रखा है। इस जटिल माहौल में सरकार की दूरदर्शितापूर्ण नीतियां, भारत के लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, सोशल डिस्टेंस एवं लॉकडाउन सफल उपक्रम बनकर प्रस्तुत हो रहा है, इस महासंकट को लेकर एक सकारात्मक वातावरण निर्मित्त हुआ है। ये प्रयोग एवं उपक्रम समूची दुनिया को कोरोना से लडऩे की शक्ति से अवगत कराते हुए बड़ी शक्तियों एवं विभिन्न राष्ट्रों को कोरोना-मुक्ति के लिए प्रेरित कर रही है। सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप कर भारत ने चेचक और पोलियो को खत्म कर दुनिया को बड़ा उपहार दिया है। एक बार फिर दुनिया चाहती है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नेतृत्व कर भारत दुनिया को दिखाए कि क्या किया जा सकता है, कैसे इस महासंकट से सम्पूर्ण मानवता को मुक्ति दिलाई जा सकती है। भारत के प्रति दुनिया में बदलते नजरिये एवं बढ़ती सकारात्मक सोच को एक उजाला बनाकर प्रस्तुति देना होगा, इसके लिये देश के प्रत्येक नागरिक को अब अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि कोरोना के आसन्न खतरे को हल्के में लेना देश के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। कुछ नासमझ लोग अभी भी इसी महामारी की गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं और भूलें करने को तत्पर है। इन भूलों की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। क्योंकि अभी तक विज्ञान कोरोना महामारी से बचने के लिए कोई निश्चित उपाय नहीं सुझा सका है और न ही इसकी कोई वैक्सीन बन पाई है। ऐसी स्थिति में भारत में कोरोना के गहराते खतरे को देखते हुए हर किसी की चिंता बढऩा स्वाभाविक है क्योंकि भारत जैसे लगभग डेढ़ अरब की आबादी वाले देश पर कोरोना का संकट कोई सामान्य बात नहीं है।

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